बहुत दिन हुए.....कुछ लिखा जाए,
कुछ ठोकरों, कुछ तजुर्बों से भी सिखा जाए। कुछ लिखा जाए....
जरूरत नहीं किसी की तफ़्सीर की, अगर
अपना ही आईना औकात दिखा जाए। कुछ लिखा जाए..
जो तुम हौसलों की स्याही से नई राह चुनते हो,
तो 'नामुमकिन' से पहले, 'एक कोशिश' लिखा जाए। कुछ लिखा जाए...
सुकून-ए-ज़िंदगी का यही फ़लसफ़ा है मुसाफ़िर,
कि हर मोड़ पर फ़िक्र को ताक पर रखा जाए।कुछ लिखा जाए...
तज़ुर्बा - Experience
तफ़्सीर - Interpretation / Feedback
औकात - Status / capability
सुकून-ए-ज़िंदगी - Peace of Life
फ़लसफ़ा - Philosophy
No comments:
Post a Comment