Saturday, April 25, 2026

बहुत दिन हुए.....कुछ लिखा जाए,

बहुत दिन हुए.....कुछ लिखा जाए,

कुछ ठोकरों, कुछ तजुर्बों से भी सिखा जाए। कुछ लिखा जाए....


​जरूरत नहीं किसी की तफ़्सीर की, अगर

अपना ही आईना औकात दिखा जाए। कुछ लिखा जाए..


​जो तुम हौसलों की स्याही से नई राह चुनते हो,

तो 'नामुमकिन' से पहले, 'एक कोशिश' लिखा जाए। कुछ लिखा जाए...


​सुकून-ए-ज़िंदगी का यही फ़लसफ़ा है मुसाफ़िर, 

कि हर मोड़ पर फ़िक्र को ताक पर रखा जाए।कुछ लिखा जाए...


तज़ुर्बा  - Experience

तफ़्सीर - Interpretation / Feedback

औकात  - Status / capability

सुकून-ए-ज़िंदगी - Peace of Life

फ़लसफ़ा - Philosophy

ताक पर रखना - To set aside/ to ignore 

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