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Thursday, June 6, 2013

........नहीं जाता

दिल में उठी हर बात को कहा नहीं जाता,
अंधो के शहर में आइना बेंचा नहीं जाता॥ 

जलना ही है तो चिराग बन, उजाले के लिए,
चिराग बन कर चिराग से जला नहीं जाता॥

आसमान पे नज़र रखने वाले पैर ज़मीं पे रख,
औरो के कंधो पर चढ़ कर कभी उड़ा नहीं जाता॥

कुछ पाने के लिए कुछ दे दिया तो सौदा हुआ,
पर दोस्ती में तो खुदगर्ज बना नहीं जाता॥

जैसा देस हो वैसा भेस भी होना चाहिए मुसाफिर,
अंगारों के बिच कागज़ का लिबास ओढ़ा नहीं जता॥











Sunday, May 12, 2013

दूर रह कर भी मेरी माँ सपनों में आती है




मेरी जुगनू सी चमक को भी सूरज बताती है,
दूर रह कर भी मेरी माँ सपनों में आती है|

जीवन के हर मौसम में, मै महफूज़ रहता हूँ,
तू धुप को छाव, बारिश को छाता बनाती है,

मुसीबतों का हो पहाड़, चाहे हो कष्ट हज़ार,
हसकर लड़ता हूँ, ये तेरी तालीम सिखाती है,

आसमान से भी ज्यदा तेरा प्यार, तुझपे सारी ख्वाहिशे निस्सार,
कैसे लिखू जो सोचता हूँ, तू मेरे शब्दों में भी  तो न समाती है,

चोट लगने पर कोई रब को है याद करता,            (हे राम, या अल्ला ,OMG )
मुझे मेरी हर चोट पर तू याद आती है,                 ( आई ग, हे माँ)



                                                              - Your beloved son
                                                                   Anoop